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43 साल पुराने मारपीट मामले में दो दोषी:1983 में दर्ज हुआ था मुकदमा, 43 साल बाद मिली सिर्फ न्यायालय उठने तक की सजा

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श्रावस्ती में 43 साल पुराने मारपीट और गाली-गलौज के एक मामले में न्यायालय का फैसला आया है। यह मुकदमा 1983 में थाना सिरसिया में दर्ज हुआ था। शनिवार को 1:00 बजे जानकारी मिली की न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए न्यायालय उठने तक की सजा सुनाई है। साथ ही, उन पर 600-600 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। श्रावस्ती के पुलिस अधीक्षक राहुल भाटी ने जिले में लंबित मामलों की खुद निगरानी की थी। उन्होंने अपर पुलिस अधीक्षक चंद्रकेश सिंह और दूसरे अधिकारियों को प्रभावी पैरवी के लिए निर्देश दिए थे। इसके बाद थाना सिरसिया में दर्ज इस पुराने मुकदमे में अभियोजन पक्ष ने मजबूती से पैरवी की। थाना सिरसिया में यह मुकदमा (मु0अ0सं0 89/1983) धारा 323 और 504 भादवि के तहत दर्ज हुआ था। इसमें बदलू सिंह (पुत्र मातवर सिंह) और ढोढ़े (पुत्र चंद्रपाल सिंह) को आरोपी बनाया गया था। ये दोनों निखिहा, थाना सिरसिया, जनपद श्रावस्ती के रहने वाले हैं। दोषियों को लंबी जेल की सजा नहीं मिली मुकदमे के मुताबिक, आरोपियों पर शिकायतकर्ता के साथ मारपीट और गाली-गलौज करने का आरोप था। इस मामले की कानूनी प्रक्रिया लंबे समय तक चलती रही। आखिरकार, मुकदमा दर्ज होने के करीब 43 साल बाद, साल 2026 में न्यायालय ने इस पर अपना फैसला सुनाया। 10 सितंबर 2026 को श्रावस्ती के जेएम न्यायालय के न्यायाधीश दिलीप कुमार साहनी ने दोनों आरोपियों को दोषी माना। न्यायालय ने उन्हें न्यायालय उठने तक की सजा और हर एक पर 600 रुपये का जुर्माना लगाया। यानी, 43 साल पुराने इस मामले में दोषियों को लंबी जेल की सजा नहीं मिली। न्यायालय ने उन्हें सिर्फ न्यायालय उठने तक की कैद और 600-600 रुपये का आर्थिक दंड भरने का आदेश दिया। करीब चार दशक से भी ज्यादा समय पहले दर्ज हुए इस मुकदमे में फैसला आना इसे खास बनाता है। 1983 में शुरू हुई कानूनी प्रक्रिया का नतीजा 2026 में आया। भले ही सजा की अवधि कम रही, लेकिन इतने लंबे समय से लंबित मामले में न्यायालय का फैसला आना और दोषियों को सजा मिलना अहम है। 43 साल पुराने मामले में सिर्फ न्यायालय उठने तक की सजा इस आधार पर खबर लगाई गई है सर, 80 ट्रेड के बीच 80 के दशक का मामला