मल्लूपुर गांव के विमल आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की पढ़ाई में मदद कर रहे हैं। वह सोशल मीडिया के जरिए जरूरतमंद बच्चों की मदद की अपील करते हैं और उन्हें निःशुल्क शिक्षा भी देते हैं। उनके घर के बरामदे से शुरू हुई इस पाठशाला में अब 200 से 250 बच्चे मुफ्त पढ़ाई कर रहे हैं। विमल सोशल मीडिया पर बच्चों की जरूरतों के बारे में जानकारी देते हैं। उनकी अपील पर कई लोग जन्मदिन या दूसरे आयोजनों का कुछ खर्च बच्चों की पढ़ाई के लिए दान करते हैं। इस मदद से बच्चों को कॉपी, किताब, पेंसिल, रबर, स्टेशनरी और पढ़ाई का दूसरा सामान मिलता है। जरूरतमंद बच्चों की स्कूल फीस भरने में भी सहायता की जाती है। शुरुआत में कुछ ही बच्चे यहां पढ़ने आते थे। धीरे-धीरे आसपास के गांवों से भी बच्चों की संख्या बढ़ने लगी। अब लगभग 200 से 250 बच्चे मुफ्त शिक्षा के लिए पहुंच रहे हैं। बच्चों की संख्या बढ़ने से घर के बरामदे में जगह और दूसरी सुविधाओं की कमी होने लगी है। विमल का कहना है कि उनका लक्ष्य है कि आर्थिक तंगी के कारण किसी भी बच्चे की पढ़ाई न रुके। उनकी टीम आगे चलकर ‘फीस फ्री स्कूल’ शुरू करने की योजना बना रही है। बच्चों की शिक्षा के इस काम में समाज के लोगों से लगातार मदद मिल रही है।
करुणानिधि-स्टालिन पर विजय की टिप्पणी से बवाल, डीएमके ने किया जोरदार...
चेन्नई। तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी डीएमके ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा पार्टी के दिवंगत नेता एम. करुणानिधि और अध्यक्ष एम. के. स्टालिन...








































