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नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की उपासना:साहस, शांति और शक्ति की प्रतीक हैं माता, भक्तों को मिलता है आत्मबल


सिद्धार्थनगर के उसका बाजार में शारदीय नवरात्रि के दौरान क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बना हुआ है। नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की जा रही है। श्रद्धालु माता की आराधना कर सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा की उपासना से भक्तों को आत्मबल, सकारात्मक ऊर्जा और जीवन में बिना डरे आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। मां चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है। इसी कारण उन्हें मां चंद्रघंटा कहा जाता है। माता का वाहन सिंह है, जिसे शक्ति, शौर्य और वीरता का प्रतीक माना जाता है। उनके स्वरूप में शक्ति और शांति का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। धार्मिक मान्यताओं में मां का यह रूप भक्तों को साहस और निर्भीकता की प्रेरणा देता है। नारी शक्ति और साहस का प्रतीक हैं मां चंद्रघंटा मां चंद्रघंटा का स्वरूप नारी शक्ति, पराक्रम और आत्मविश्वास का प्रतीक माना जाता है। माता का स्वरूप यह संदेश देता है कि नारी केवल ममता और करुणा की प्रतिमूर्ति ही नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर अन्याय के खिलाफ मजबूती से खड़ी होने वाली शक्ति भी है। नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व है। तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना कर श्रद्धालु जीवन में सुख-शांति और सफलता की कामना करते हैं। मान्यता है कि माता की पूजा से मन में सकारात्मकता आती है और कठिन परिस्थितियों का सामना करने का आत्मविश्वास मिलता है।

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