श्रावस्ती मे श्रीलंका से बौद्ध अनुयायी बीते रविवार श्रावस्ती पहुंचे। उन्होंने बौद्ध तपोस्थली गंध कुटी पर विश्व शांति के लिए विशेष पूजा-अर्चना की। सोमवार सुबह 7:00 बजे बौद्ध तीर्थ क्षेत्र से जानकारी दी गई की बौद्ध भिक्षु ने भगवान बुद्ध के उपदेश सुनाए और उनकी शिक्षाओं को मानव जीवन के लिए उपयोगी बताया। बौद्ध भिक्षु ने बताया कि बुद्ध की शिक्षाएं आडंबर और रहस्यवाद से दूर हैं। ये जीवन के दुखों के कारणों को समझने और उन्हें दूर करने का रास्ता बताती हैं। इस पूजा में बड़ी संख्या में श्रीलंकाई अनुयायी शामिल हुए। पूजा के बाद श्रद्धालुओं ने कई ऐतिहासिक जगहों का दौरा किया। इनमें शिवली स्तूप, कौशांब कुटी, सभा मंडप, सूर्यकुंड और कच्ची-पक्की कुटियां शामिल थीं। उन्होंने भगवान बुद्ध से जुड़े इतिहास और श्रावस्ती के धार्मिक महत्व के बारे में जानकारी ली।
माना जाता है कि ज्ञान मिलने के बाद भगवान बुद्ध ने अपना सबसे ज्यादा समय श्रावस्ती में बिताया था। उन्होंने यहां करीब 24 से 25 वर्षावास किए थे। इसी वजह से श्रीलंका समेत बौद्ध धर्म से जुड़े देशों के श्रद्धालुओं की श्रावस्ती में खास आस्था है। इन दिनों श्रीलंका, थाईलैंड और म्यांमार से बौद्ध भिक्षु और श्रद्धालु लगातार श्रावस्ती आ रहे हैं। इससे तीर्थ क्षेत्र में विदेशी श्रद्धालुओं की रौनक बढ़ गई है।
श्रीलंकाई बौद्ध अनुयायियों ने श्रावस्ती में की विश्व शांति पूजा:गंध कुटी पर पारंपरिक रीति-रिवाज से की विशेष पूजा-अर्चना, बुद्ध के उपदेश भी सुने
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