पवन वर्मा | श्रावस्ती15 मिनट पहले
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श्रावस्ती में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से एक दिन पहले गुरुवार को बाजारों में पर्व की रौनक देखने को मिली। मंदिरों, घरों और धार्मिक जगहों पर जन्मोत्सव की तैयारियां आखिरी दौर में पहुंच गई हैं। बाजारों में राधा-कृष्ण की आकर्षक पोशाक, मुकुट, बांसुरी, मोरपंख, लड्डू गोपाल की मूर्तियां और अलग-अलग डिजाइन के झूले श्रद्धालुओं को खूब पसंद आ रहे हैं।
जन्माष्टमी के लिए दुकानों पर सजावट का सामान, फूल, गुब्बारे, सिंहासन, माखन-मिश्री, पंचामृत सामग्री और खास प्रसाद भी मिल रहे हैं। गुरुवार को बाजारों में खरीदारी के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही दुकानों पर बढ़ने लगी है। लोग अपने घरों में लड्डू गोपाल के जन्मोत्सव की तैयारी के लिए अपनी पसंद के हिसाब से पोशाक और झूले खरीदने पहुंच रहे।
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बाजारों में राधा-कृष्ण की आकर्षक पोशाक, मुकुट, बांसुरी, मोरपंख, लड्डू गोपाल की मूर्तियों की डिमांड बढ़ गई है।

झूले में विराजित लड्डू गोपाल की मूर्तियां लोगों को खूब पसंद आ रही हैं।
दुकानदार विशाल गुप्ता ने बताया कि जन्माष्टमी को लेकर बाजार में अच्छी चहल-पहल है। श्रद्धालु कन्हैया जी की पोशाक, झूले और सजावट का सामान खरीद रहे हैं। इस बार खासकर नए डिजाइन के झूलों और पोशाक की मांग ज्यादा है। फूल, गुब्बारे और मिठाई की दुकानों पर भी खरीदारी बढ़ेगी।
जिले के मंदिरों के साथ-साथ पुलिस थानों, पुलिस लाइन और ग्रामीण क्षेत्रों में भी जन्माष्टमी का आयोजन धूमधाम से किया जाता है। पुलिस लाइन में होने वाले कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसे लेकर तैयारियां पूरी की जा रही हैं। रात में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय खास पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम होंगे।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में आधी रात को भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा के कारागार में हुआ था। उस समय कंस के अत्याचार से धरती परेशान थी। अधर्म और अत्याचार को खत्म करने और धर्म की स्थापना के लिए भगवान कृष्ण ने अवतार लिया था। इसी वजह से जन्माष्टमी को बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।

अलग-अलग डिजाइन के झूले श्रद्धालुओं को खूब पसंद आ रहे हैं।
































