
महराजगंज के दिग्विजयनाथ इंटरमीडिएट कॉलेज चौक बाजार में युग पुरुष ब्रह्मलीन दिग्विजयनाथ की 57वीं और राष्ट्र संत अवैद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि मनाई गई। इस अवसर पर एक व्याख्यान का आयोजन किया गया, जो कार्यक्रम का दूसरा दिन था। कार्यक्रम की शुरुआत महाराजद्वय के छायाचित्र के सामने दीप प्रज्वलन और पुष्प अर्पण से हुई। मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथियों को बैज लगाकर, उत्तरीय और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। विद्यालय की छात्राओं ने सरस्वती वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत किया। मुख्य वक्ता डॉ. दीनबंधु शुक्ला ने कार्यक्रम को संबोधित किया। वे पंचायत इंटरमीडिएट कॉलेज परतावल बाजार, महराजगंज के प्रधानाचार्य हैं। उन्होंने कहा कि भारत प्राचीन काल से ही समृद्ध देश रहा है और इसकी ज्ञान परंपरा हजारों साल पुरानी है। डॉ. शुक्ला ने बताया कि यह परंपरा केवल अतीत की याद नहीं, बल्कि आज के समाज के लिए एक मार्गदर्शक विचारधारा है। उन्होंने कहा कि आधुनिक समाज में तकनीकी प्रगति के साथ नैतिकता, जीवन मूल्य, पर्यावरण संतुलन और मानसिक शांति जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। ऐसे में प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा के सिद्धांत आज भी मानवता को सही दिशा दे रहे हैं। इस दौरान डॉ. हरिन्द्र यादव ने कहा कि महन्त अवैद्यनाथ का भारतीय समाज, संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र में बहुआयामी योगदान रहा है। विद्यालय के प्रवक्ता डॉ. राकेश कुमार तिवारी ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध बनाने में प्राचीन ऋषि-मुनियों का योगदान बहुत महत्वपूर्ण और अमूल्य रहा है। डॉ. तिवारी ने बताया कि ऋषि-मुनियों ने केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि विज्ञान, चिकित्सा, खगोल शास्त्र और दर्शन के क्षेत्र में भी गहराई से रिसर्च की।
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