बस्ती जिले में हर्रैया तहसील के रजिस्ट्री दफ्तर में करीब 22 साल पहले हुए जमीन के एक कथित फर्जी बैनामे के मामले में पुलिस ने सात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। शिकायतकर्ता हजरत हनीफ ने आरोप लगाया है कि उनकी जमीन का एक हिस्सा उनकी जानकारी और सहमति के बिना फर्जी दस्तावेज बनाकर दूसरे व्यक्ति को खड़ा करके बेच दिया गया। एफआईआर के मुताबिक, यह घटना 21 जनवरी 2004 को सुबह 10 बजे से शाम चार बजे के बीच हर्रैया तहसील के रजिस्ट्री दफ्तर में हुई थी। आरोप है कि शिकायतकर्ता की जगह सिकंदरपुर निवासी गुड्डू को खड़ा किया गया। उसकी फोटो, फर्जी पहचान पत्र, हस्ताक्षर और अंगूठा लगाकर जमीन का बैनामा कराया गया। इसके बाद 27 फरवरी 2004 को सिकंदरपुर के नायब तहसीलदार के कोर्ट से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन का नामांतरण भी करा लिया गया। शिकायतकर्ता हजरत हनीफ का कहना है कि वह रोजगार के लिए बाहर रहते थे। जब वह वापस लौटे और अपनी जमीन पर पहुंचे, तो लोगों ने बताया कि जमीन बिक चुकी है। रजिस्ट्री दफ्तर से दस्तावेजों की नकल निकलवाने पर उन्हें इस कथित फर्जीवाड़े के बारे में पता चला। आरोप है कि जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने उन्हें गाली दी और जान से मारने की धमकी भी दी। मारपीट का आरोप भी लगाया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने पहले पुलिस से शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने 30 जून 2026 को पुलिस अधीक्षक को आवेदन दिया और कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के आदेश के बाद हर्रैया थाने में रामसूरत, प्रेम प्रकाश, हरिप्रसाद, सुनील कुमार, रामजग, भगौती और गुड्डू के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना (फर्जी दस्तावेज बनाना), मारपीट और धमकी देने समेत कई धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। यह मुकदमा 9 सितंबर को दोपहर 12:39 बजे दर्ज हुआ।
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