फरेन्दा तहसील मुख्यालय में पिछले कई दिनों से बिजली की सप्लाई ठीक नहीं है। इससे सरकारी दफ्तरों और आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर असर पड़ रहा है। तहसील कार्यालय, ग्राम न्यायालय, क्षेत्र पंचायत मुख्यालय, क्षेत्राधिकारी कार्यालय, कोतवाली, चकबंदी, सिंचाई व वन विभाग, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बैंक और शिक्षण संस्थान जैसी जरूरी जगहों पर कामकाज ठप है। कंप्यूटर, इंटरनेट, प्रिंटर और ऑनलाइन पोर्टल जैसी बिजली पर निर्भर सेवाएं बंद होने से दिक्कतें आ रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिजली कटौती का कोई तय शेड्यूल नहीं है। बिजली अक्सर अचानक चली जाती है। दुकानदार, कारोबारी और आम परिवार बार-बार बिजली जाने से आर्थिक और रोजमर्रा की परेशानियों का सामना कर रहे हैं। खासकर बरसात की रातों में बिजली कई बार आती-जाती है। इससे घरों और सड़कों पर अंधेरा फैल जाता है, जिससे सांप जैसे जंगली जीवों के निकलने का खतरा भी बढ़ जाता है। निवासियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन लिमिटेड और उसकी इकाई पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की मनमानी और लापरवाही से यह समस्या बढ़ी है। विभाग के जिम्मेदार अधिकारी चुप हैं। उपभोक्ताओं को कहीं से भी कोई संतोषजनक जानकारी या समाधान नहीं मिल रहा है। इस अनदेखी से जनता में गुस्सा बढ़ रहा है और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं। विधायक और दूसरे नेता अभी तक इस स्थिति पर कोई ठोस जवाब नहीं दे पाए हैं। लोग तुरंत समीक्षा और सुधार की मांग कर रहे हैं। नागरिकों की मुख्य मांगों में फरेन्दा की बिजली सप्लाई की तुरंत जांच, अनियमित कटौती के कारणों की पारदर्शी जांच और सप्लाई व्यवस्था में सुधार शामिल है।







































