श्रावस्ती के मल्हीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में इन दिनों कुत्ता, सियार, बंदर और दूसरे जानवरों के काटने के मामले बढ़ गए हैं। पिछले एक सप्ताह में करीब 80 लोग जानवरों के काटने के बाद इलाज के लिए सीएचसी पहुंचे हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सावधान रहने और जानवर के काटने पर तुरंत डॉक्टर की मदद लेने की अपील की है। सीएचसी मल्हीपुर के डॉक्टर रविंद्र सोनकर ने बताया कि पिछले सात दिनों में करीब 80 लोग पशु काटने की शिकायत लेकर अस्पताल आए हैं। इनमें कुत्ता, सियार और बंदर के काटने के मामले ज्यादा हैं। उन्होंने कहा कि जानवर के काटने के बाद समय पर इलाज न मिलने पर रेबीज का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए किसी भी तरह की लापरवाही न करें। साबुन से घाव को अच्छे से धुले डॉक्टर सोनकर ने यह भी बताया कि कुत्ता, सियार, बंदर या बिल्ली के काटने पर सबसे पहले काटे गए हिस्से को साबुन और साफ बहते पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद बिना देर किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचकर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। जरूरत के हिसाब से मरीज को एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाई जाती है। डॉक्टर ने लोगों से गुजारिश की है कि पशु के काटने के बाद घरेलू इलाज या झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें। समय पर अस्पताल पहुंचकर डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज की पूरी प्रक्रिया करें, ताकि रेबीज जैसी गंभीर बीमारी से बचा जा सके।
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