मेरठ में स्क्रैप कारोबारी पर फायरिंग के मामले में एक आरोपी ने पुलिस को चौंका दिया। लोहियानगर इलाके में हुई वारदात के बाद तलाश में जुटी पुलिस के बीच शूटर रवीश अचानक SSP कार्यालय पहुंच गया। उसके हाथ में एक पोस्टर था और उसने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। रवीश ने दावा किया कि उसे डर था कि पकड़े जाने पर पुलिस उसके पैर में गोली मार सकती है। इसी आशंका के चलते उसने खुद पुलिस के पास आने का फैसला किया।
पुलिस ने भेजा जेल
आरोपी के SSP कार्यालय पहुंचते ही पुलिसकर्मियों ने उसे घेर लिया और हिरासत में ले लिया। इसके बाद उसे लोहियानगर थाने भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि तलाशी के दौरान रवीश के पास से .32 बोर की पिस्टल और छह कारतूस मिले हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हथियार उसके पास कैसे पहुंचा और वारदात में इसकी क्या भूमिका रही।
मामला शुक्रवार का है। पुलिस के अनुसार, जुमे की नमाज के बाद स्क्रैप कारोबारी हारून पर फायरिंग की गई थी। हमले में हारून को गोली लगी और उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना के पीछे पैसों का विवाद बताया जा रहा है। शुरुआती जांच में कमेटी के करीब 24 लाख रुपये के लेनदेन की बात सामने आई है।
हारून के भाई सोनू मलिक की शिकायत पर लोहियानगर थाने में पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। नामजद आरोपियों में इरशाद, रवीश, फिरोज, शबाना और बशीर शामिल हैं। घटना के बाद पुलिस टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थीं।
एसएसपी ने कहा ये
थाने पहुंचने के दौरान रवीश के हाथ में मौजूद पोस्टर भी चर्चा का विषय रहा। इसमें मुख्यमंत्री से माफी मांगने और आगे अपराध नहीं करने की बात लिखी थी। मीडिया के सवालों पर उसने फायरिंग की घटना में अपनी भूमिका बताई और कहा कि घटना के समय वह गुस्से में था। उसका दावा है कि छीना-झपटी के दौरान गोली चली। हालांकि पुलिस अभी उसके बयानों और बरामद हथियार समेत अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।
SSP बीबीजीटीएस मूर्ति ने बताया कि आरोपी को हिरासत में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया की जा रही है। मामले में फरार अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमों को लगाया गया है।








































