रिपोर्ट:गजेन्द्र गुप्ता
महराजगंज: राजनीति का रंग भी अजीब होता है—यह अच्छे-अच्छों का अनुशासन उतारकर किनारे रख देता है। निचलौल ब्लॉक के बढ़या मुस्तकीम उर्फ गेरहवा गाँव में आयोजित ‘PDA चौपाल कार्यक्रम’ इसका गवाह बना। विधायक बनने की हसरत दिल में संजोए फौजी से नेता बने गौरीशंकर गुप्त कार्यक्रम में पहुँचे तो थे जनता का दिल जीतने, लेकिन भोजपुरी बिरहा गायिका की सुरीली तान छेड़ते ही उनका ‘नेताजी अवतार’ पूरी तरह जाग उठा।
फिर क्या था! अनुशासन की वर्दी तो फौजी साहब बहुत पहले उतार चुके थे,रविवार को मंच पर उन्होंने नेतागिरी की गरिमा भी उतार फेंकी। बिरहा गायिका के सुरों से गद्गद होकर भावी विधायक जी आर्केस्ट्रा की तर्ज़ पर खुलेआम मंच से नोट उड़ाते नज़र आए। जनता वहाँ अपने मुद्दों के हल और किसी गंभीर नेतृत्व की आस में बैठी थी, लेकिन उन्हें देखने को मिला एक उम्दा ‘स्टेज शो‘, जहाँ होने वाले जनप्रतिनिधि जी खुद नोटों की बारिश कर रहे थे।
कहा जाता है कि फौजी अनुशासन की मिसाल होते हैं, लेकिन गौरीशंकर जी के इस कारनामे ने साबित कर दिया कि जब विधायकी का सपना आँखों में तैरता है, तो सबसे पहले ‘अनुशासन’ ही छुट्टी पर जाता है। चुनावी समर में उतरे ये महाशय अभी से मंच पर पैसों की नुमाइश कर रहे हैं; ऐसे में जनता भी हैरान-परेशान सोच रही है कि जो साहब चुनाव जीतने से पहले ही आर्केस्ट्रा वाले अंदाज़ में आ गए हैं, वो जनप्रतिनिधि बनने के बाद जनता के सम्मान और पैसों का कितना ‘अनुशासित’ हिसाब रखेंगे!







































