नई दिल्ली। भारतीय नौसेना का शक्तिशाली युद्धपोत आईएनएस त्रिशूल अपनी लंबी समुद्री यात्रा के तहत स्पेन के वालेंसिया बंदरगाह पहुँच गया है। यह रणनीतिक तैनाती भूमध्य सागर और अटलांटिक क्षेत्रों में भारत की बढ़ती समुद्री ताकत और कूटनीतिक सहयोग को दर्शाती है।
वालेंसिया बंदरगाह पर भव्य स्वागत और द्विपक्षीय गतिविधियाँ
वालेंसिया पहुँचने के बाद भारतीय नौसेना और स्पेनिश नौसेना के बीच आपसी संबंधों को प्रगाढ़ करने के लिए कई कार्यक्रम तय किए गए हैं:
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ऑपरेशनल सहभागिता: दोनों देशों के नौसैनिक आपसी अनुभव साझा करेंगे और विभिन्न ऑपरेशनल गतिविधियों में हिस्सा लेंगे।
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सांस्कृतिक आदान-प्रदान: खेल प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिससे दोनों सेनाओं के बीच आपसी समझ और मजबूत होगी।
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रणनीतिक महत्व: रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के दौरे विदेशी नौसेनाओं को करीब लाने और सुरक्षित समुद्री वातावरण सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
फ्रांस के टूलॉन में 'वरुण अभ्यास' में निभाई अहम भूमिका
स्पेन पहुँचने से पहले आईएनएस त्रिशूल ने फ्रांस के टूलॉन बंदरगाह पर आयोजित प्रतिष्ठित द्विपक्षीय अभ्यास ‘वरुण’ के 24वें संस्करण में सक्रिय रूप से भाग लिया था।
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सैन्य साजो-सामान: इस अभ्यास के दौरान एनएच90 हेलीकॉप्टरों और अटलांटिक-2 समुद्री गश्ती विमानों ने अपनी युद्धक क्षमता का प्रदर्शन किया।
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प्रमुख अभ्यास: दोनों देशों की नौसेनाओं ने पनडुब्बी रोधी युद्ध, सतह पर वार करने वाले अभियानों और लाइव फायरिंग का अभ्यास किया।
समुद्री सुरक्षा और सहयोग की दिशा में कदम
आईएनएस त्रिशूल की यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि भारतीय नौसेना मित्र देशों के साथ अपने संबंधों को लगातार नई ऊँचाइयाँ दे रही है। इस प्रकार के संयुक्त अभियानों से न केवल दोनों सेनाओं के बीच तालमेल बेहतर होता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर समुद्री सुरक्षा को भी बढ़ावा मिलता है।









































