बस्ती में मनोरमा नदी को साफ करने का अभियान शुरू हो गया है। सरवलिया घाट से मैढोवा तक करीब 5 किलोमीटर नदी की सफाई की जाएगी। नदी की खराब हालत देखकर आसपास के गांवों के निषाद समाज के लोग खुद इस काम में जुट गए हैं। बुधवार को करीब 50 ग्रामीण बिना किसी आर्थिक मदद के नदी में उतरे और एक दिन में लगभग 500 मीटर नदी की धारा से जलकुंभी हटाई। इस अभियान में युवाओं के साथ 70 साल के भोधर निषाद भी नदी में उतरकर सफाई करते दिखे। उनकी उम्र भले ही 70 साल हो गई हो, लेकिन मनोरमा नदी के लिए उनका लगाव आज भी उतना ही गहरा है। भोधर निषाद ने कहा कि मनोरमा उनके लिए सिर्फ नदी नहीं, मां के समान है। वे इसी के सामने पले-बढ़े हैं और इसी में खेलते-कूदते रहे हैं। निषाद समाज के लोग, जिन्हें नदी की धार और उसके स्वभाव की पारंपरिक जानकारी है, नाव लेकर बीच धारा तक पहुंचे। उन्होंने पारंपरिक औजारों से जलकुंभी को काटकर बाहर निकाला। किनारे पर मौजूद दूसरे ग्रामीण उसे बाहर खींचते रहे। किसी ने अपनी मजदूरी या आर्थिक मदद नहीं मांगी। सभी का मकसद सिर्फ मनोरमा की धारा को साफ करना था। ग्रामीणों ने अब सरवलिया घाट से मैढोवा तक करीब 5 किलोमीटर मनोरमा नदी को साफ करने का संकल्प लिया है। उनका कहना है कि वे बिना आर्थिक मदद के भी अपने स्तर पर अभियान जारी रखेंगे। अगर प्रशासन या समाज के लोगों का सहयोग मिला, तो सफाई का काम और बड़े इलाके में किया जाएगा। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि इस समय नदी में पानी का बहाव ज्यादा है। जलकुंभी को काटकर निकालने पर वह बहाव के साथ आगे बह सकती है। इसलिए उनका मानना है कि अभी नदी की सफाई के लिए सही समय है। इस अभियान में क्षेत्र पंचायत सदस्य राजेश निषाद, मनजीत निषाद, सरवन निषाद, तिलक राम निषाद, राम लोटन निषाद, बुसुनदास निषाद, भोधर निषाद, चंद्रभान निषाद, गोविंद निषाद समेत आसपास के गांवों के कई और ग्रामीण शामिल हैं। ग्रामीणों की यह पहल सिर्फ एक सफाई अभियान नहीं है, बल्कि अपनी नदी और आने वाली पीढ़ियों को बचाने की एक कोशिश है।
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