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कजरी तीज पर रमपुरवा के युवा अयोध्या से लाएंगे डाक:प्राचीन चंद्रभाल बाबा मंदिर में करेंगे भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक

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बहराइच जिले के रमपुरवा गांव के शिवभक्त युवा कजरी तीज के मौके पर डाक कांवड़ यात्रा निकालेंगे। ये युवा अयोध्या धाम पहुंचकर सरयू नदी का जल भरेंगे और फिर अपने गांव लौटकर जलाभिषेक करेंगे। युवाओं ने संकल्प लिया है कि वे अयोध्या से डाक कांवड़ लेकर रमपुरवा स्थित प्राचीन चंद्रभाल बाबा मंदिर पहुंचेंगे। यहां वे भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे। यह डाक कांवड़ यात्रा कजरी तीज के अवसर पर निकाली जा रही है। इस दौरान शिवभक्त लगातार चलते हुए मंदिर तक पहुंचेंगे। कजरी तीज को सुहागिन महिलाओं के लिए सबसे पवित्र त्योहारों में से एक माना जाता है। इसे भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है, इसलिए इसे भादो तीज या बड़ी तीज भी कहते हैं। इस बार कजरी तीज 12 अगस्त 2025 को है। महिलाएं यह व्रत अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और अखंड सुहाग के लिए रखती हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से पति-पत्नी के बीच प्रेम और विश्वास बना रहता है और वैवाहिक जीवन में कभी दरार नहीं आती। पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। भादो मास की तृतीया को ही शिव जी ने पार्वती जी की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। इसलिए इस दिन शिव-पार्वती की पूजा का विशेष फल मिलता है। “कजरी” का मतलब काले बादलों से जुड़े गीत होता है। सावन-भादो में जब चारों तरफ हरियाली और काले बादल होते हैं, तब महिलाएं झूले झूलते हुए कजरी गीत गाती हैं। ये गीत प्रेम, विरह और खुशहाली का प्रतीक हैं। इसी से इसका नाम कजरी तीज पड़ा। इस दिन किसान अच्छी फसल के लिए भी प्रार्थना करते हैं। कहा जाता है कि कजरी तीज के बाद धान की फसल अच्छी होती है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान में इसे बहुत धूमधाम से मनाया जाता है।