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करुणानिधि-स्टालिन पर विजय की टिप्पणी से बवाल, डीएमके ने किया जोरदार विरोध-प्रदर्शन

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News Desk

चेन्नई। तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी डीएमके ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा पार्टी के दिवंगत नेता एम. करुणानिधि और अध्यक्ष एम. के. स्टालिन पर की गई कथित अपमानजनक टिप्पणियों के विरोध में शनिवार को पूरे राज्य में प्रदर्शन किया।

वरिष्ठ नेता पीके शेखर बाबू का बयान

विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ नेता पीके शेखर बाबू ने मुख्यमंत्री के बयानों की कड़ी निंदा की। उन्होंने स्टालिन के व्यक्तित्व और मानवीय स्वभाव की सराहना करते हुए उन्हें 'मिस्टर क्लीन' करार दिया और कहा कि वे हमेशा नैतिकता और मूल्यों का पालन करते हैं। बाबू ने कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार द्वारा 1975-77 के आपातकाल के दौरान स्टालिन की जेल यात्रा को लेकर दिए गए बयानों पर भी कड़ी आपत्ति जताई।

भ्रष्टाचार के आरोपों को बताया फिल्मी डायलॉग

डीएमके नेताओं ने विधानसभा में मुख्यमंत्री विजय द्वारा करुणानिधि और स्टालिन के कार्यकाल पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। बाबू ने इन आरोपों को केवल 'एक घंटे तक बोले गए फिल्मी डायलॉग' करार दिया और कहा कि सदन में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन को इन आरोपों का जवाब तक नहीं देने दिया गया।

घायल शेर की तरह मैदान में उतरेगी डीएमके

पार्टी नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि डीएमके वर्तमान में 'एक घायल शेर की तरह मैदान में डटी हुई है' और आने वाले समय में इन सभी बयानों और राजनीतिक हमलों का पूरा हिसाब-किताब बराबर किया जाएगा। पार्टी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि विधानसभा में दिया गया मुख्यमंत्री का भाषण पांच बार मुख्यमंत्री रहे करुणानिधि, दिवंगत केंद्रीय मंत्री मुरासोली मारन और स्टालिन के त्याग का मजाक उड़ाने वाला था।

क्या है पूरा विवाद?

यह पूरा राजनीतिक टकराव 7 सितंबर को विधानसभा में शुरू हुआ, जब मुख्यमंत्री विजय ने पिछली डीएमके सरकारों के दौरान कथित संगठित भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। विजय ने अपने संबोधन के दौरान सरकारिया आयोग की रिपोर्ट के साथ-साथ 2021-26 के कार्यकाल के कथित भ्रष्टाचार से जुड़े प्रवर्तन निदेशालय (ED) के आधिकारिक दस्तावेजों का हवाला दिया था, जिसमें स्टालिन और उदयनिधि का नाम लिया गया था।