बस्ती के मेघऊपुर में एक दिव्यांग परिवार पन्नी तानकर जिंदगी गुजारने को मजबूर है। परिवार की हालत इसलिए भी गंभीर है क्योंकि मां खुद पोलियो से दिव्यांग हैं और उनके चारों बेटे भी दिव्यांग हैं। बच्चे चलने-फिरने में असमर्थ हैं। परिजनों के मुताबिक, वे बोल भी नहीं पाते और मानसिक रूप से भी कमजोर हैं। दैनिक भास्कर की टीम ने शनिवार दोपहर 1.30 बजे मेघऊपुर पहुंचकर परिवार की स्थिति देखी। गंदगी और बदबू के बीच यह परिवार पन्नी के नीचे रहने को मजबूर था। चारों बच्चे गंदे कपड़ों में आधा शरीर ढके हुए नजर आए। परिवार की हालत देखकर पता चलता है कि इनके लिए रोजमर्रा की जिंदगी कितनी मुश्किल है। परिवार का कहना है कि उन्हें वर्षों से न तो अपना घर मिला और न ही सरकारी योजनाओं का फायदा। परिवार के रामकिशन पांडेय ने बताया कि वे मजदूरी कर किसी तरह घर का खर्च चलाते हैं। वे असल में आजमगढ़ के सियरहा गांव के रहने वाले हैं और पत्नी गुड़िया पांडेय व पांच बच्चों के साथ बस्ती में रह रहे हैं। तीन महीने पहले उन्होंने बेटी विनीता का विवाह कुदरहा के रखौना में किया है। गुड़िया पांडेय ने बताया कि उनके दाहिने पैर में पोलियो है। चारों बेटों का जन्म घर पर ही हुआ था और सभी को पोलियो की खुराक भी पिलाई गई थी। बेटी शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ है, जबकि चारों बेटे दिव्यांग हैं। परिवार का कहना है कि उन्हें किसी सरकारी योजना का फायदा नहीं मिला, यहां तक कि उनके पास राशन कार्ड भी नहीं है। डिप्टी सीएमओ डॉ. एके चौधरी ने बताया कि चारों बच्चों को मेडिकल जांच के लिए भेजा गया है। उनकी जांच की जाएगी और यह भी पता लगाया जाएगा कि बच्चों की ऐसी स्थिति क्यों हुई है।
थाना समाधान दिवस में पहुंचे 6 मामले:सिंदुरिया में सभी शिकायतें राजस्व...
सिंदुरिया थाना परिसर में शनिवार को थाना समाधान दिवस आयोजित किया गया। इसमें दोपहर तक कुल छह फरियादी अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे। हालांकि, सुनवाई...





































