सरयू नदी का जलस्तर तेजी से घटकर लाल निशान से भी नीचे पहुंच गया है। पानी कम होने के साथ ही नदी के किनारों पर जमा गंदगी, कीचड़ और सड़ रहे जैविक पदार्थ अब परेशानी का कारण बनने लगे हैं। इससे नदी किनारे और आसपास के इलाकों में दुर्गंध फैलने के साथ मच्छरों का प्रकोप बढ़ने की आशंका है। स्थानीय लोगों को डायरिया, त्वचा संक्रमण और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा भी सताने लगा है। लोगों ने प्रशासन से नदी किनारे तत्काल सफाई कराने, दवा का छिड़काव कराने और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। जलस्तर घटते ही किनारों पर दिखने लगी गंदगी सरयू का पानी कम होने के बाद नदी के किनारे कई जगह गंदगी और कीचड़ दिखाई देने लगा है। पानी के साथ बहकर आए जैविक पदार्थ भी किनारे पर जमा हैं। पानी में डूबे रहने के कारण इनके सड़ने से आने वाले दिनों में दुर्गंध बढ़ सकती है। नदी के आसपास रहने वाले लोगों को इससे परेशानी होने की आशंका है। सड़ रहे जैविक पदार्थ से बढ़ सकता है दुर्गंध का असर जलस्तर कम होने के बाद नदी किनारे जमा जैविक पदार्थ खुले में आने लगे हैं। इनके सड़ने की प्रक्रिया तेज होने पर वातावरण में बदबू फैल सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते सफाई नहीं कराई गई तो नदी किनारे रहने और आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कीचड़ और गंदगी से मच्छरों का प्रकोप बढ़ने की आशंका नदी किनारे कई स्थानों पर कीचड़ जमा है। पानी कम होने के बाद ऐसे स्थान मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल हो सकते हैं। स्थानीय लोगों को आशंका है कि यदि सफाई और दवा का छिड़काव नहीं कराया गया तो मच्छरों की संख्या बढ़ सकती है। इससे आसपास रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ेंगी। डायरिया और त्वचा संक्रमण का भी खतरा गंदगी और दूषित पानी के कारण डायरिया, त्वचा संबंधी संक्रमण और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। नदी किनारे रहने वाले लोगों के साथ पशुओं और अन्य स्थानीय गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ने की आशंका है। ऐसे में लोगों ने स्वास्थ्य और स्वच्छता व्यवस्था पर अभी से ध्यान देने की मांग की है। प्रशासन से सफाई और दवा छिड़काव की मांग स्थानीय लोगों ने प्रशासन से नदी किनारे विशेष सफाई अभियान चलाने की मांग की है। इसके साथ ही कीचड़ और गंदगी वाले स्थानों पर दवा का छिड़काव कराने की बात कही है। लोगों का कहना है कि जलस्तर कम होने के बाद बीमारी फैलने की आशंका को देखते हुए संबंधित विभागों को समय रहते जरूरी कदम उठाने चाहिए। स्वच्छ पानी की व्यवस्था हो तो टलेगा बीमारी का खतरा स्थानीय लोगों ने आसपास के इलाकों में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित कराने की भी मांग की है। लोगों का कहना है कि जलस्तर घटने के बाद पैदा होने वाली दुर्गंध और गंदगी की समस्या को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सकता है। यदि सफाई, छिड़काव और पेयजल व्यवस्था पर समय रहते ध्यान दिया गया तो बीमारी फैलने के खतरे को काफी हद तक रोका जा सकेगा।
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