श्रावस्ती जिले के हरिहरपुररानी विकास खंड की ग्राम पंचायत चहलवा में विकास के दावों की सच्चाई सामने आ गई है। गांव की खराब सड़कें और जलभराव इसकी वजह है। जलनिकासी की ठीक व्यवस्था न होने से गांव की गलियों में हर जगह पानी भरा है और रास्ते कीचड़ में बदल गए हैं। इससे ग्रामीणों का घरों से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या लंबे समय से है। लेकिन, जिम्मेदार लोग इसके स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। बारिश के बाद हालात और खराब हो जाते हैं। गलियों में पानी के साथ मिट्टी और कीचड़ जमा होने से पैदल चलना मुश्किल हो जाता है। कई जगहों पर इतना ज्यादा पानी भर जाता है कि लोगों को रास्ता पार करने में बहुत परेशानी होती है। पंकज प्रजापति ने बताया कि रोजमर्रा के जरूरी कामों के लिए भी लोगों को कीचड़ और गंदे पानी के बीच से जाना पड़ता है। शाहनवाज ने बताया कि जलभराव के कारण घरों से निकलते समय कपड़े और जूते खराब हो जाते हैं। साथ ही, कीचड़ में फिसलकर चोट लगने का डर भी रहता है। तबरेज आलम के अनुसार, बारिश के दिनों में गांव की गलियों की हालत और खराब हो जाती है, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ जाती है। गांव की गंभीर समस्याओं में गर्भवती महिलाओं का आना-जाना भी शामिल है। जियाऊलहक ने बताया कि प्रसव पीड़ा होने पर महिला को समय पर अस्पताल पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। जलभराव और कीचड़ के कारण एंबुलेंस को गांव तक पहुंचने में भारी परेशानी होती है। ऐसे में मरीज को मुख्य सड़क तक पहुंचाने के लिए परिवार और ग्रामीणों को बहुत मेहनत करनी पड़ती है। हफीजुल्लाह ने कहा कि गांव के रास्तों की हालत सुधारने के साथ जलनिकासी की व्यवस्था होना बहुत जरूरी है। तिलक राम मोरिया और दूसरे ग्रामीणों ने मांग की है कि गांव की गलियों को जलभराव से बचाने के लिए नालियां बनाई जाएं और उनकी नियमित सफाई कराई जाए।
श्रावस्ती के चहलवा गांव की गलियां बनीं दलदल:जलभराव से ग्रामीणों का घरों से निकलना मुश्किल, एंबुलेंस पहुंचने में भी परेशानी
श्रावस्ती जिले के हरिहरपुररानी विकास खंड की ग्राम पंचायत चहलवा में विकास के दावों की सच्चाई सामने आ गई है। गांव की खराब सड़कें और जलभराव इसकी वजह है। जलनिकासी की ठीक व्यवस्था न होने से गांव की गलियों में हर जगह पानी भरा है और रास्ते कीचड़ में बदल गए हैं। इससे ग्रामीणों का घरों से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या लंबे समय से है। लेकिन, जिम्मेदार लोग इसके स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। बारिश के बाद हालात और खराब हो जाते हैं। गलियों में पानी के साथ मिट्टी और कीचड़ जमा होने से पैदल चलना मुश्किल हो जाता है। कई जगहों पर इतना ज्यादा पानी भर जाता है कि लोगों को रास्ता पार करने में बहुत परेशानी होती है। पंकज प्रजापति ने बताया कि रोजमर्रा के जरूरी कामों के लिए भी लोगों को कीचड़ और गंदे पानी के बीच से जाना पड़ता है। शाहनवाज ने बताया कि जलभराव के कारण घरों से निकलते समय कपड़े और जूते खराब हो जाते हैं। साथ ही, कीचड़ में फिसलकर चोट लगने का डर भी रहता है। तबरेज आलम के अनुसार, बारिश के दिनों में गांव की गलियों की हालत और खराब हो जाती है, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ जाती है। गांव की गंभीर समस्याओं में गर्भवती महिलाओं का आना-जाना भी शामिल है। जियाऊलहक ने बताया कि प्रसव पीड़ा होने पर महिला को समय पर अस्पताल पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। जलभराव और कीचड़ के कारण एंबुलेंस को गांव तक पहुंचने में भारी परेशानी होती है। ऐसे में मरीज को मुख्य सड़क तक पहुंचाने के लिए परिवार और ग्रामीणों को बहुत मेहनत करनी पड़ती है। हफीजुल्लाह ने कहा कि गांव के रास्तों की हालत सुधारने के साथ जलनिकासी की व्यवस्था होना बहुत जरूरी है। तिलक राम मोरिया और दूसरे ग्रामीणों ने मांग की है कि गांव की गलियों को जलभराव से बचाने के लिए नालियां बनाई जाएं और उनकी नियमित सफाई कराई जाए।







































