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NCR की रियल एस्टेट तस्वीर बदलेगी! MPD 2047, UER-2 और जेवर एयरपोर्ट से कौन से इलाके बनेंगे हॉटस्पॉट?

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News Desk

नई दिल्ली। मास्टर प्लान ऑफ दिल्ली 2047 (MPD 2047) के लागू होने और नए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की शुरुआत से नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) का पूरा रियल एस्टेट परिदृश्य बदलने जा रहा है। अब दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा और जेवर एयरपोर्ट अलग-अलग शहर न रहकर एक विशाल एकीकृत इकोनॉमिक हब बनने की राह पर हैं। ओराम ग्रुप के फाउंडर प्रदीप मिश्रा ने एक विशेष बातचीत में बताया कि कैसे यह नया मास्टर प्लान संपत्ति की परिभाषा और उसके निवेश के रुझान को पूरी तरह बदल देगा।

NCR का नया रियल एस्टेट ढांचा: एकीकरण की ओर

अब दिल्ली की अर्थव्यवस्था को गुरुग्राम, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद से अलग करके देखना संभव नहीं है। मेट्रो के विस्तृत होते नेटवर्क और RRTS (रैपिड रेल) ने मेरठ, पानीपत, करनाल और रोहतक जैसे दूरदराज के इलाकों को दिल्ली के हाई-स्पीड रीजनल नेटवर्क से जोड़ दिया है। इससे दैनिक आवागमन आसान हो रहा है और मांग में बढ़ोतरी हो रही है।

UER-II: सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि स्ट्रेटेजिक कॉरिडोर

अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (UER-II) केवल एक सड़क नहीं, बल्कि एक 'स्ट्रेटेजिक मोबिलिटी कॉरिडोर' है:

  • इकोनॉमिक कनेक्टिविटी: यह नेशनल हाईवे, इंडस्ट्रियल एरिया और नए अर्बन सेंटर्स को सीधे आपस में जोड़ता है।

  • द्वारका से जेवर तक का लिंक: UER-2 के दक्षिणी विस्तार को NH-8 के जरिए सीधे जेवर एयरपोर्ट की दिशा से जोड़ा जा रहा है। इससे द्वारका और पश्चिमी दिल्ली की जेवर तक पहुंच बेहद आसान हो जाएगी।

जेवर एयरपोर्ट से नोएडा-ग्रेटर नोएडा को एकतरफा फायदा

जेवर एयरपोर्ट को केवल एक एविएशन प्रोजेक्ट के रूप में नहीं, बल्कि NCR की भावी आर्थिक भूगोल के केंद्र के रूप में देखा जा रहा है। रणनीतिक संपर्कों के चालू होने के बाद नोएडा और ग्रेटर नोएडा सीधे इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय (IGI) हवाई अड्डे और बड़े लॉजिस्टिक नेटवर्क से जुड़ जाएंगे। इसका सबसे ज्यादा लाभ वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को मिलेगा।

'प्राइम लोकेशन' की बदली परिभाषा

पहले प्राइम लोकेशन का मतलब शहर के केंद्र या मेट्रो के पास होना होता था, लेकिन अब नया दौर 'रीजनल नेटवर्क' का है:

  • मल्टी-नोडल कनेक्टिविटी: अब दूरी के बजाय यह देखा जाएगा कि कोई संपत्ति कितने रोजगार केंद्रों और इकोनॉमिक नोड्स से जुड़ी है।

  • ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD): सार्वजनिक परिवहन स्टेशनों के पास उच्च घनत्व और मिक्स्ड-यूज विकास की नीति लागू होगी।

निवेशकों के लिए सावधानी और सही रणनीति

स्टेशन या हाईवे के पास जमीन होने मात्र से अपने आप कमर्शियल विकास या हाई FAR का फायदा नहीं मिलता। सट्टेबाजी से बचते हुए निवेशकों को प्रोजेक्ट के सटीक अलाइनमेंट, लैंड यूज, जोनिंग अप्रूवल और धरातल पर हो रहे काम की वास्तविक प्रगति को जांचकर ही फैसला लेना चाहिए।