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Allahabad High Court का बड़ा फैसला: अब कैमरे के सामने दर्ज होंगे गवाहों के बयान, DGP को दिया निर्देश

प्रयागराज। यूपी में अब गवाहों से पूछताछ का तरीका बदल सकता है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि जांच के दौरान गवाह जो बयान देता है, उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग होनी चाहिए। कोर्ट ने DGP यूपी को इस नियम को अनिवार्य करने पर विचार करने को कहा है।

क्या है पूरा मामला?

मामला आगरा के बसौनी थाने के दहेज हत्या केस का है। इसमें सास चंद्रकांता ने हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल ने केस डायरी देखी तो FIR और गवाह के बयान में अंतर मिला।कोर्ट ने विवेचक ACP अनिल कुमार को तलब किया। ACP ने माना कि उन्होंने शिकायतकर्ता का बयान लेते वक्त मोबाइल से वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं की थी, जबकि BNSS के नए कानून में इसका प्रावधान है। इस पर उन्होंने कोर्ट से माफी भी मांगी।

कोर्ट ने कहा कि उसके सामने रोज ऐसे केस आ रहे हैं जहां पुलिस कागज पर कुछ भी बयान लिख देती है और बाद में कहती है कि गवाह ने यही कहा था। अगर वीडियो रिकॉर्डिंग होगी तो कोई भी यह आरोप नहीं लगा पाएगा कि पुलिस ने मनगढ़ंत बयान बनाया है।

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कोर्ट ने कहा, “पुलिस का काम किसी को भी जबरन सजा दिलाना नहीं है। पुलिस का काम ईमानदारी से सच को सामने लाना है।”

पुलिस के लिए नई गाइडलाइन

हाईकोर्ट ने जांच को बेहतर बनाने के लिए DGP के लिए 5 पॉइंट की गाइडलाइन भी सुझाई है -सूचना मिलते ही तुरंत घटनास्थल पर पहुंचा जाए।मौके से CCTV, मोबाइल और अन्य डिजिटल सबूत तुरंत सुरक्षित किए जाएं।जरूरी होने पर CDR और फॉरेंसिक जांच कराई जाए।बयान कैमरे के सामने दर्ज किया जाए।निर्दोष को न फंसाया जाए।इसी मामले में कोर्ट ने सास चंद्रकांता को राहत देते हुए कहा कि उसके खिलाफ दहेज उत्पीड़न के कोई ठोस सबूत नहीं हैं, आरोप सामान्य हैं, इसलिए उसे सशर्त जमानत दी जाती है।

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