बालाघाट। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में संक्रामक बीमारियों के चलते 30 से अधिक आदिवासी बच्चों की कथित मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस गंभीर त्रासदी को लेकर जहां विपक्षी दल लगातार राज्य सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं, वहीं कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता अभिजीत दीपके भी स्थिति का जायजा लेने जिले के दौरे पर पहुंचे हैं। स्थानीय आदिवासी युवाओं के साथ वे प्रभावित गांवों में पहुंचकर शोकाकुल परिवारों से मुलाकात कर रहे हैं।
पीड़ित परिवारों से मुलाकात और गांवों का दौरा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अभिजीत दीपके अडोरी, कोरका और बोनदारी सहित अन्य दूरदराज के आदिवासी बहुल गांवों का दौरा कर पीड़ित परिजनों से मिलकर वस्तुस्थिति की जानकारी जुटा रहे हैं। बालाघाट रवाना होने से पूर्व उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक बयान साझा किया, जिसमें उन्होंने जिले में आदिवासियों के नौनिहालों की मौत को बेहद चिंताजनक और प्रशासनिक नाकामी बताया।
छात्रों को हिरासत में लेने की कोशिश का आरोप, सरकार पर सवाल
दीपके ने अपने पोस्ट में पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि स्थानीय आदिवासी कार्यकर्ताओं से मिली सूचना के मुताबिक, उनके दौरे में सहयोग और समन्वय कर रहे कुछ आदिवासी छात्रों को पुलिस द्वारा हिरासत में लेने का प्रयास किया गया। सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने तीखा तंज कसा कि आखिर भाजपा शासित राज्य जमीनी हकीकत और सच के सामने आने से इतना भयभीत क्यों हैं।
हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान, शासन और प्रशासन को नोटिस जारी
इस मानवीय त्रासदी को लेकर कानूनी मोर्चे पर भी शिकंजा कस गया है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने मामले में दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए कड़ा रुख अपनाया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया एवं न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने राज्य शासन के स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा बालाघाट कलेक्टर सहित अन्य जिम्मेदार पक्षों को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब तलब किया है। उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर निर्धारित की है।





































