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महराजगंज सीमा पर खाद तस्करी का साइकिल नेटवर्क:लावारिस यूरिया की बरामदगी से खुला नया पैंतरा

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महराजगंज में खाद तस्करी का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। थाना सोनौली पुलिस द्वारा हाल ही में कैथवलिया उर्फ बरगदही के पास से लावारिस हालत में 6 बोरी यूरिया खाद और 4 आदत साइकिलों की बरामदगी ने यह साफ कर दिया है कि तस्कर अब बड़े वाहनों के बजाय ‘छोटे पैंतरों’ और स्थानीय संपर्कों का सहारा ले रहे हैं। पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी के कड़े निर्देशों और अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ के पर्यवेक्षण में चलाए जा रहे सघन चेकिंग अभियान के दौरान हुई इस कार्रवाई से तस्करों के मंसूबों पर पानी जरूर फिरा है, लेकिन सीमा पार खाद की कालाबाजारी के इस सिंडिकेट ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। साइकिल से ‘ड्रॉप एंड रन’ रणनीति सोनौली थाना क्षेत्र के कैथवलिया उर्फ बरगदही इलाके से मिली 4 पुरानी साइकिलें और खाद की बोरियां तस्करों के काम करने के नए तरीके की ओर इशारा करती हैं। जांच और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, तस्कर अब मुख्य रास्तों और चौकियों से बचने के लिए पगडंडियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस रणनीति में स्थानीय युवाओं या दिहाड़ी मजदूरों को मामूली रकम का लालच देकर साइकिलों पर खाद की बोरियां लादकर सीमा के करीब स्थित गांवों तक पहुंचाया जाता है। वहां खाद को सुरक्षित ठिकानों या झाड़ियों में छिपा दिया जाता है, जिसे बाद में मौका मिलते ही नेपाल की ओर पार करा दिया जाता है। पुलिस टीम की मुस्तैदी से खाद की यह खेप सीमा पार तो नहीं हो सकी, लेकिन पुलिस की आहट पाते ही तस्कर माल और साइकिलें छोड़कर मौके से फरार होने में कामयाब रहे। मामले में अज्ञात के विरुद्ध धारा 113 कस्टम एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कर बरामद माल को नौतनवा कस्टम कार्यालय सौंप दिया गया है।

नेपाल में भारतीय खाद की मांग और भारी मुनाफा भारत-नेपाल सीमा पर यूरिया और अन्य खादों की तस्करी के पीछे मुख्य वजह दोनों देशों के दामों में बड़ा अंतर है। भारत सरकार द्वारा भारतीय किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी के कारण यहां यूरिया बेहद सस्ते दरों (लगभग ₹266 प्रति 45 किग्रा बोरी) पर उपलब्ध होती है। वहीं नेपाल में कृषि मौसम के दौरान खाद की भारी किल्लत बनी रहती है। नेपाल के सीमावर्ती बाजारों में यही भारतीय यूरिया दोगुनी या तिगुनी कीमतों पर बेची जाती है। इस मोटे मुनाफे के चक्कर में सीमावर्ती इलाकों का एक बड़ा नेटवर्क इस अवैध कारोबार में लिप्त है। छोटी-छोटी मात्रा में साइकिल या पैदल खाद पार कराने का यह सिलसिला धीरे-धीरे एक बड़ी तस्करी का रूप ले लेता है।

भारतीय किसानों के हक पर डाका तस्करी के इस नेटवर्क का सीधा असर स्थानीय भारतीय किसानों पर पड़ रहा है। जब खाद की एक बड़ी खेप अवैध रूप से नेपाल भेज दी जाती है, तो सीमावर्ती क्षेत्रों में कृत्रिम किल्लत पैदा हो जाती है। सीजन के समय स्थानीय किसानों को अपनी फसलों के लिए यूरिया खाद पाने के लिए लंबी लाइनों में लगना पड़ता है या कालाबाजारी का शिकार होना पड़ता है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पगडंडियों से होने वाली इस तस्करी पर जब तक पूरी तरह से लगाम नहीं लगेगी, तब तक दुकानों पर खाद की किल्लत की समस्या बनी रहेगी।

पुलिस और कस्टम का अगला कदम इस बरामदगी के बाद सोनौली पुलिस और कस्टम विभाग ने सीमावर्ती पगडंडियों पर निगरानी बढ़ा दी है। पुलिस प्रशासन अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि लावारिस मिलीं 04 साइकिलें किसकी हैं और कैथवलिया इलाके में यह खाद किस दुकान या गोदाम से खरीदी गई थी। सीमावर्ती इलाकों की सभी सरकारी व निजी खाद दुकानों के स्टॉक की जांच करने की योजना बनाई जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं स्थानीय विक्रेताओं की सांठगांठ से तो यह खाद तस्करों तक नहीं पहुंच रही थी।
एसपी शक्ति मोहन अवस्थी के सख्त रुख को देखते हुए आने वाले दिनों में सीमा पार तस्करी के इस ‘साइकिल नेटवर्क’ पर और कड़े प्रहार की उम्मीद है, जिससे भारतीय किसानों को उनके हक की खाद समय पर मिल सके और सीमा पर अपराध नियंत्रण में रहे।