श्रावस्ती के जमुनहा क्षेत्र में राप्ती नदी का पानी कम होने के साथ ही कटान का खतरा भी बढ़ गया है। मधवापुर घाट के पास राप्ती नदी किनारे की जमीन काट रही है। शुक्रवार सुबह 10:00 बजे मंदिर के महंथ ने बताया यह कटान अब प्राचीन बंदरहा बाबा मंदिर के काफी करीब पहुंच गई है, जिससे मंदिर के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। इसे लेकर मंदिर के पुजारी, श्रद्धालु और स्थानीय ग्रामीण चिंतित हैं। मधवापुर घाट पर स्थित प्राचीन बंदरहा बाबा मंदिर इस क्षेत्र के लोगों की आस्था का मुख्य केंद्र है। यहां रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए आते हैं। मंदिर के महंथ बाबा चेतन दास ने बताया कि करीब चार साल से जब भी राप्ती नदी का पानी घटता बढ़ता है, कटान मंदिर की ओर शुरू हो जाती है। हर साल नदी मंदिर के और करीब आती जा रही है। महंथ के मुताबिक, नदी की कटान रोकने के लिए कई बार विभाग के अधिकारियों को बताया गया, लेकिन अब तक मंदिर की सुरक्षा के लिए कोई पक्का इंतजाम नहीं किया गया। अभी पानी घटने के बाद भी कटान जारी है, जिससे खतरा और बढ़ गया है। अगर समय रहते बचाव काम नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में मंदिर को नुकसान पहुंच सकता है। ग्रामीणों और जिला श्रद्धालुओं ने प्रशासन से राप्ती की कटान रोकने के लिए तुरंत कदम उठाने और मंदिर की सुरक्षा के लिए पक्का बचाव काम कराने की मांग की है। महंथ बाबा चेतन दास ने भी प्रशासन से मंदिर को कटान से बचाने के लिए जल्द पक्की कार्रवाई की मांग की है। हालांकि विभागीय अधिकारियों की तरफ से इस मामले में अभी कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
श्रावस्ती में राप्ती की कटान से प्राचीन मंदिर पर संकट:4 साल से नदी बढ़ रही मंदिर की ओर, महंत ने कहा- अब तक नहीं हुआ पुख्ता इंतजाम
श्रावस्ती के जमुनहा क्षेत्र में राप्ती नदी का पानी कम होने के साथ ही कटान का खतरा भी बढ़ गया है। मधवापुर घाट के पास राप्ती नदी किनारे की जमीन काट रही है। शुक्रवार सुबह 10:00 बजे मंदिर के महंथ ने बताया यह कटान अब प्राचीन बंदरहा बाबा मंदिर के काफी करीब पहुंच गई है, जिससे मंदिर के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। इसे लेकर मंदिर के पुजारी, श्रद्धालु और स्थानीय ग्रामीण चिंतित हैं। मधवापुर घाट पर स्थित प्राचीन बंदरहा बाबा मंदिर इस क्षेत्र के लोगों की आस्था का मुख्य केंद्र है। यहां रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए आते हैं। मंदिर के महंथ बाबा चेतन दास ने बताया कि करीब चार साल से जब भी राप्ती नदी का पानी घटता बढ़ता है, कटान मंदिर की ओर शुरू हो जाती है। हर साल नदी मंदिर के और करीब आती जा रही है। महंथ के मुताबिक, नदी की कटान रोकने के लिए कई बार विभाग के अधिकारियों को बताया गया, लेकिन अब तक मंदिर की सुरक्षा के लिए कोई पक्का इंतजाम नहीं किया गया। अभी पानी घटने के बाद भी कटान जारी है, जिससे खतरा और बढ़ गया है। अगर समय रहते बचाव काम नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में मंदिर को नुकसान पहुंच सकता है। ग्रामीणों और जिला श्रद्धालुओं ने प्रशासन से राप्ती की कटान रोकने के लिए तुरंत कदम उठाने और मंदिर की सुरक्षा के लिए पक्का बचाव काम कराने की मांग की है। महंथ बाबा चेतन दास ने भी प्रशासन से मंदिर को कटान से बचाने के लिए जल्द पक्की कार्रवाई की मांग की है। हालांकि विभागीय अधिकारियों की तरफ से इस मामले में अभी कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।






































