श्रावस्ती में राप्ती नदी का घटता-बढ़ता जलस्तर तटवर्ती किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। जमुनहा और इकौना तहसील क्षेत्र में नदी की कटान लगातार जारी है। मंगलवार को किसानों ने बताया कि दोनों तहसील क्षेत्रों में अब तक करीब 500 बीघा खेती की जमीन और फसल नदी की धारा में समा चुकी है। खेतों तक पहुंचा पानी, जमीन कट रही कई खेतों में पानी पहुंच गया है। वहीं नदी किनारे की उपजाऊ जमीन लगातार कटकर नदी में मिल रही है। जमुनहा क्षेत्र के कथरा माफी के घाटे पुरवा, हसनापुर और हरिहरपुर करनपुर के मजरा पिपरहवा के किसानों की खेती जोगिया ग्राम पंचायत क्षेत्र में है। यहां राप्ती की तेज धारा खेतों को काट रही है। इकौना क्षेत्र के कई तटवर्ती गांवों में भी खेतों की जमीन धीरे-धीरे नदी में समा रही है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसी का एक एकड़, किसी की 15 बीघा जमीन गई किसान सहजराम ने बताया कि उनका करीब एक एकड़ खेत नदी में समा चुका है। फकीरे के मुताबिक, उनकी करीब 15 बीघा उपजाऊ जमीन नदी में चली गई। वहीं छोटेलाल ने बताया कि नदी किनारे उनकी सात बीघा जमीन थी, जिसमें करीब पांच बीघा नदी की धारा में बह गई। धान की फसल अभी पूरी तरह पकी नहीं है। जमीन बचने की उम्मीद कम होने पर कुछ किसान कच्ची फसल काटकर पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। कर्ज चुकाने की चिंता बढ़ी किसानों का कहना है कि बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी में हजारों रुपये खर्च कर फसल तैयार की थी। उम्मीद थी कि फसल बेचकर परिवार का खर्च चलेगा और कर्ज भी चुकाया जाएगा। लेकिन कटान ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। किसानों ने प्रशासन से कटान रोकने के प्रभावी उपाय करने, नुकसान का सर्वे कराने और उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। डीएम ने सर्वे के दिए निर्देश जिलाधिकारी अन्नपूर्णा गर्ग ने बताया कि खेती की जमीन के नुकसान का सर्वे कराने के लिए सभी एसडीएम को निर्देश दिए गए हैं। सर्वे रिपोर्ट के बाद नियमानुसार उपलब्ध धनराशि के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
राप्ती की कटान से जमीन और फसल नदी में समाई:जमुनहा-इकौना में घटते-बढ़ते जलस्तर से किसान परेशान, पकी फसल काटकर पशुओं को खिला रहे
श्रावस्ती में राप्ती नदी का घटता-बढ़ता जलस्तर तटवर्ती किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। जमुनहा और इकौना तहसील क्षेत्र में नदी की कटान लगातार जारी है। मंगलवार को किसानों ने बताया कि दोनों तहसील क्षेत्रों में अब तक करीब 500 बीघा खेती की जमीन और फसल नदी की धारा में समा चुकी है। खेतों तक पहुंचा पानी, जमीन कट रही कई खेतों में पानी पहुंच गया है। वहीं नदी किनारे की उपजाऊ जमीन लगातार कटकर नदी में मिल रही है। जमुनहा क्षेत्र के कथरा माफी के घाटे पुरवा, हसनापुर और हरिहरपुर करनपुर के मजरा पिपरहवा के किसानों की खेती जोगिया ग्राम पंचायत क्षेत्र में है। यहां राप्ती की तेज धारा खेतों को काट रही है। इकौना क्षेत्र के कई तटवर्ती गांवों में भी खेतों की जमीन धीरे-धीरे नदी में समा रही है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसी का एक एकड़, किसी की 15 बीघा जमीन गई किसान सहजराम ने बताया कि उनका करीब एक एकड़ खेत नदी में समा चुका है। फकीरे के मुताबिक, उनकी करीब 15 बीघा उपजाऊ जमीन नदी में चली गई। वहीं छोटेलाल ने बताया कि नदी किनारे उनकी सात बीघा जमीन थी, जिसमें करीब पांच बीघा नदी की धारा में बह गई। धान की फसल अभी पूरी तरह पकी नहीं है। जमीन बचने की उम्मीद कम होने पर कुछ किसान कच्ची फसल काटकर पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। कर्ज चुकाने की चिंता बढ़ी किसानों का कहना है कि बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी में हजारों रुपये खर्च कर फसल तैयार की थी। उम्मीद थी कि फसल बेचकर परिवार का खर्च चलेगा और कर्ज भी चुकाया जाएगा। लेकिन कटान ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। किसानों ने प्रशासन से कटान रोकने के प्रभावी उपाय करने, नुकसान का सर्वे कराने और उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। डीएम ने सर्वे के दिए निर्देश जिलाधिकारी अन्नपूर्णा गर्ग ने बताया कि खेती की जमीन के नुकसान का सर्वे कराने के लिए सभी एसडीएम को निर्देश दिए गए हैं। सर्वे रिपोर्ट के बाद नियमानुसार उपलब्ध धनराशि के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।






































