जयपुर। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा एवं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के निर्देशन में प्रदेश में किडनी रोगियों को आसानी से और निःशुल्क डायलिसिस सुविधा उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश में अब तक 16,003 मरीजों को कुल 1,17,258 डायलिसिस सेशन की निःशुल्क सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इन सेवाओं के तहत मरीजों को उपलब्ध कराई गई उपचार सुविधा का कुल अनुमानित मूल्य करीब 21.11 करोड़ रुपए है। प्रधानमंत्री नेशनल डायलिसिस कार्यक्रम के तहत प्रदेश के 35 जिला चिकित्सालयों में 149 डायलिसिस मशीनें संचालित हैं।
प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्रीमती गायत्री राठौड़ ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में अप्रैल से अगस्त 2026 तक प्रदेश में 4,265 मरीजों को 31,675 डायलिसिस सेशन की निःशुल्क सुविधा दी जा चुकी है। इनमें प्रधानमंत्री नेशनल डायलिसिस कार्यक्रम के तहत 35 केंद्रों पर 3,489 मरीजों के 25,860 सेशन तथा बजट घोषणा के तहत चिन्हित चिकित्सा संस्थानों में 776 मरीजों के 5,815 सेशन शामिल हैं।उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 11,738 मरीजों को 85,583 डायलिसिस सेशन की निःशुल्क सुविधा उपलब्ध कराई गई। इनमें प्रधानमंत्री नेशनल डायलिसिस कार्यक्रम के 35 केंद्रों पर 8,507 मरीजों के 65,148 सेशन तथा बजट घोषणा के तहत चिन्हित चिकित्सा संस्थानों में 3,198 मरीजों के 19,187 सेशन शामिल हैं।
श्रीमती राठौड़ ने कहा कि राज्य बजट घोषणा वर्ष 2022-23 की अनुपालना में प्रदेश के 182 चिकित्सा संस्थानों में हीमोडायलिसिस सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। इनमें से 102 चिकित्सा संस्थानों में सुविधा उपलब्ध है। शेष संस्थानों में चिकित्सकों एवं कार्मिकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है तथा 30 सितम्बर 2026 तक सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। प्रमुख शासन सचिव ने बताया कि सरकारी व्यवस्था के साथ सीएसआर के माध्यम से भी निःशुल्क डायलिसिस सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। जिला चिकित्सालय नदबई (भरतपुर) एवं उपजिला चिकित्सालय सिवाना (बालोतरा) में हंस फाउंडेशन, गुरुग्राम के सहयोग से यह सुविधा संचालित है। सिवाना में 3 मशीनों के माध्यम से 12 मरीजों के 575 सेशन तथा नदबई में 3 मशीनों के माध्यम से 21 मरीजों के 673 सेशन आयोजित किए गए हैं।
श्रीमती राठौड़ ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि डायलिसिस की जरूरत वाले मरीजों को उपचार के लिए दूर नहीं जाना पड़े। इसी उद्देश्य से जिला चिकित्सालयों के साथ अन्य चिकित्सा संस्थानों में भी डायलिसिस सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। भविष्य में सीएचसी स्तर तक डायलिसिस सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि डायलिसिस किडनी रोगियों के लिए नियमित और जीवनरक्षक उपचार है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि जरूरतमंद मरीजों को समय पर, उनके नजदीक ही पूरी तरह निःशुल्क डायलिसिस सुविधा मिले। सरकारी व्यवस्था के साथ निजी जनसहभागिता और सीएसआर के सहयोग से इन सेवाओं को लगातार और मजबूत किया जा रहा है।








































